श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 10: भृगु, अग्नि और अग्निष्वात्तादि पितरोंकी सन्तानका वर्णन  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  1.10.16-17 
तेषां तु सन्ततावन्ये चत्वारिंशच्च पञ्च च।
कथ्यन्ते वह्नयश्चैते पितापुत्रत्रयं च यत्॥ १६॥
एवमेकोनपञ्चाशद्वह्नय: परिकीर्तिता:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इन तीनों की पैंतालीस संतानें (प्रत्येक के पंद्रह पुत्र) हुईं। पिता अग्नि और उनके तीन पुत्र मिलकर अग्नि कहलाते हैं। इस प्रकार कुल उनचास (49) अग्नियाँ कही गई हैं। 16-17॥
 
These three had forty-five children [fifteen sons each]. Father Agni and his three sons together are called Agni. In this way a total of forty nine (49) fires have been said. 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)