श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 10: भृगु, अग्नि और अग्निष्वात्तादि पितरोंकी सन्तानका वर्णन  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  1.10.14-15 
योऽसावग्न्यभिमानी स्याद् ब्रह्मणस्तनयोऽग्रज:।
तस्मात्स्वाहा सुताँल्लेभे त्रीनुदारौजसो द्विज॥ १४॥
पावकं पवमानं तु शुचिं चापि जलाशिनम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! ब्रह्माजी के ज्येष्ठ पुत्र, अभिमानी अग्निदेव की पत्नी से स्वाहा नाम के तीन पुत्र हुए - अति तेजस्वी पावक, वायुभक्षी और जलभक्षी शुचि ॥14-15॥
 
Hey Dwija! The proud god of Agni, who is the eldest son of Brahmaji, had three sons from his wife named Swaha, the very bright Pavak, the wind-eater and the water-eater Shuchi. 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)