(6) ... यह समस्त वस्तुएँ दिवय-युगल श्रीश्रीराधा-कृष्ण की भक्ति के अनुकूल हैं। अतएव, मैं इन समस्त वस्तुओं को भगवान् की लीला-वृद्धि में सहायक मानता हूँ।
(7) मैं इन सब वस्तुओं के बिना नहीं जी सकता। यदि मैं इन्हें त्याग दूँ तो निश्चित ही मेरी मृत्यु हो जाएगी।
(8) श्रील भक्तिविनोद ठाकुर कहते हैं, “हे कृष्ण! जिस भी किसी वस्तु से मुझे आपका स्मरण होता है, वह मेरा जीवन एवं प्राण है। ”
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥