গৌরপ্রেম রসার্ণবে, সে তরংগে যেবা ডুবে,
সে রাধামাধব-অন্তরঙ্গ।
গৃহে বা বনেতে থাকে, ‘হা গৌরাঙ্গ!’ ব’লে ডাকে,
নরোত্তম মাগে তা’র সঙ্গ॥4॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥