वैष्णव भजन  »  श्रील जगन्नाथ प्रणति
 
 
श्रील जगन्नाथ प्रणति 
भाषा: हिन्दी | English | தமிழ் | ಕನ್ನಡ | മലയാളം | తెలుగు | ગુજરાતી | বাংলা | ଓଡ଼ିଆ | ਗੁਰਮੁਖੀ |
 
 
गौराविर्भाव-भूमेस्त्वं निर्देष्टा सज्जन-प्रियः।
वैष्णव-सार्वभौमः श्रीजगन्नाथाय ते नमः॥
 
 
शब्दार्थ
मैं उन जगन्नाथ दास बाबाजी को सादर नमन करता हूँ, जो समस्त वैष्णव समुदाय द्वारा सम्मानित हैं तथा जिन्होंने गौरांग महाप्रभु की आविर्भाव भूमि की खोज की थी।
 
 
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥