श्रील प्रभुपाद के हिंदी में प्रवचन  »  730228R3-JAKARTA_Hindi
 
 
श्रील प्रभुपाद के हिंदी में प्रवचन
 
वार्तालाप
जकार्ता, 28-फरवरी-1973
 
 
 
महिला: "है दो बार गया है, तीन बार गया है। बेटी को, दोनों को, लड़की को शादी करवा के लौट के आई, क्योंकि इस तीनों को भी शादी करवानी है, क्योंकि school में पढ़ती है वो। उसका बहुत माथा खराब था, कुछ बात छोटी नहीं थी। सेवा नहीं करती थी वो, नहीं खाती थी वो। खाती थी तो बहुत मगज खराब। English करती है ना, उसमें उसका मगज खराब होता है। माता की बात कोई सुनती नहीं। वो हमारे घर में छोटा सा बंदर बना है। गीता है, वो सब आज पढ़ता है हमारी माता का, और बेटी तो सुनती नहीं थी। जब भी ये इसका मिला हनुमान, English पढ़ती है, उसी से हुआ है। तभी से ये हुई है अच्छी, अच्छा स्वभाव उसका बन गया है सेवा का। एक बात है, अभी कोई सिद्धि-विधि है नहीं, तो एक मैं बहुत दुखी हूं एक बात से। तो कुछ नहीं है मेरे पास, हमारा तो भगवान सब कुछ दिया है, कोई कमी नहीं है। हमारा मन तो चले... ने कहा कि दो बेटा है और चार लड़की। दो लड़की की शादी हुई, एक बेचारी दुखी है, तो इत्यादि से यहां बैठी है। और एक बेटा, ये जो बड़ा बेटा है ना, वो सेवाधारी भी है, सब गुण है उसमें। बस एक बात है, शराब बहुत पी... वो इस भाव पर बैठी है कि स्वामी सच्चा प्रभुपाद है, आए दया तो हमारे ऊपर हाथ कृपा का धरेगा तो हम शराब छोड़ देता। उसने हमारे से promise किया है। हमें तो भाई सच-सच कहता है, बहुत समझा कहता है, प्यार में, गुस्से से, इधर से, बहुत सुनता है। कभी-कभी सुनता है, कभी-कभी तो कभी ऐसी कृपा को ऐसा रास्ता बता है। कभी सुनती है, कभी उसका दिमाग खराब हो जाएगा।"

श्रील प्रभुपाद: "बस क्या, अपनी खुशी से जब तक नहीं छोड़ेगा... जैसा ये लोग सब शराब पीता था, मांस खाता था, छोड़ दिया अपनी खुशी से।"

महिला: "हां, कृपा कहां से बिखर गया तो हजार ऐसे छोड़ दिया..."

श्रील प्रभुपाद: "जो छोड़ेगा नहीं उसको हाथ धरने से क्या होगा? कुछ कृपा होती है... कृपा, कृपा तो करने के लिए सब कृपा तो हम लोग का ले। अभी ना, अभी जैसे ये लोग लिया है, ऐसे लेने से तभी होगा ना। खाली हाथ धरने से कृपा कैसा होगा? बात सुनना पड़ेगा।"

महिला: "आ जाएगा, बात सुनना पड़ेगा। वो कल आया था, late हो गई। अब बोला, 'जाओ प्रभुपाद के पास शरण पड़ो, तुम्हारी जो आदतें हैं बुरी वो चली जाएंगी।' वो पक्का हो गई है, तुम्हारी आदत अच्छी नहीं है। वो धर्म वाला है, दया वाला भी है, अच्छा है स्वभाव। दरबार में सेवा-विवाह करता है, बोलता है किसको पैसा-वैसा देना है दान में दे दो। मानता है हमारी बात, मगर ये एक बात हमारे को अच्छा... क्योंकि मस्तपन के कुछ आदमी देते हैं, उसकी शनाख्त नहीं पड़ती है। तो बात क्या करते, जैसा कि वो पागल जैसा आदमी आया ना, वो तो सब जो स्वामी आते हैं नई दर में, उसी से दंगा करता है।"

श्रील प्रभुपाद: "कौन?"

महिला: "तो वो जो स्वामी बैठा था ना उधर घर में, पहले कीर्तन जपी किया अपने... कल तो उधर हुआ हाल में, पहले तो घर में हुआ ना। वो एक आदमी... नहीं, उसका नाम परशुराम है। वो तो पागल है, मगज का खराब है, गधे जैसा आदमी है। कोई भी स्वामी पर इधर में आता है ना, उसी से चर्चा बहुत करता है। वो आर्य समाज जैसे किसी ने यानी महात्मा गांधी का खून किया था ना, उसी पंथ का है। वो मगज का खराब आदमी। तो हम बोला भाई, जो-जो आदमी आते हैं स्वामी-स्वामी, उसी से ये डंडा-झगड़ा करता है। ये आदमी को, इसको बैठाना नहीं चाहिए सत्संग का, ये भाग्यशाली नहीं है। देखो कहां-कहां से आता है संत-महात्मा, वो भाग्यशाली नसीब आया होवे उसकी, उसकी बात उसका भाव खुले। ये वो आपके समर्थ समझता है, कभी तो कीर्तन सुनाया नहीं है, एक दफे भी नहीं सुनाया जाता है, नहीं तो वो ये पढ़ता है, ये मंत्र पढ़ता है, बस बोलता है बड़ा पढ़ रहा है, कुछ नहीं जानता है। जवाब तो बहुत उत्साह... तो उसी सबका मगज खराब करता है। अच्छा हाथ में होगा तो उसकी सुनेगा नहीं और पागल होगा उसी से मिल जाएगा। ये तो कल हमारा बेटा बोला, अभी 10:00 बजे आ गया, बोला 'दे है', बोला 'कोई बात नहीं, तुम लस्सी का लोटा, दूध और वो पास थोड़ा कुछ ले जा, पीने के लिए कुछ ले जा बेटा, बेटा जा।' तो आया नीचे तो दादा ने उसको रिस बोला, 'अभी देरी हो गई है।' नहीं देखा, बोला 'कहां से हम काम अपना छोड़कर airport पर जाना था, वहां भी हम छोड़... पर अभी नहीं गया, अभी यहां उधर-उधर नहीं महाराज, car उधर के पड़ा के इधर में आया है, मिलने नहीं देता है।' पांच minutes के लिए आपको दर्शन हो जाता है। वो आते ही जो सच्चा है तो भगवान को जान सकता है। एक minute जो अमीर ठंडा टंगा ले आया है, माता जी ने बोला है उसको बुलाना, बोला 'नहीं', तो उसी में उसको गुस्सा कर दिया। तो अब आया हमारे घर में, कल वो हमारे घर में था भाजा, उसने बोला 'हम लेगा, ये भी बच्चा है, वो भी हमारा बच्चा है।' हम बोला 'माफी मांगेगा तो हमारे बेटे का कोई कसूर है, माफ कर दियो।' तो हमको भी गुस्सा लग गया, घर में आया तभी बोला, 'हमारे बेटी भाई देखो, अपने प्रभुपाद को बोलो हम भी तुम्हारा बेटा है, आया तो दर्शन करने के लिए।' वो दूसरा भी आदमी ऐसा ही है, वो दास का क्या जाता है उसमें? हम आता है तो हमको उधर का हमारे वो मिलने नहीं दिया।"

श्रील प्रभुपाद: "किस समय आया था? किस समय आया था? किस वक्त आया?"

महिला: "10:30 बजे, 10:30, 10:00 बजे निकला घर से। बोला, 'अभी कीर्तन खत्म हो, 9:00 से 10:00 बजे खत्म होता है। तुम्हारे को जल्दी जाना है, हमारा घर भी नजदीक है।' मगर turn post होता है ना, तो देरी लग जाता है। तो आधा घंटा देर लग गई। पहुंचा, उसको मिलने नहीं दिया। उसको गुस्सा बन गया, 'भाई, कहां से तुम एक minute हमारे से मिलने दो।' उसने मिलने का मौका नहीं दिया। तो फिर ऐसा हुआ, हम आया हमारे घर में, तो हम बोला कि जो भी हमारी सेवा है वो आदि से हम हमारी किधर भी सहारा नहीं करो, हमारे को अच्छा नहीं लगता। वो शुरू से भी हम बोला, मांगने मांगता नहीं है कुछ भी, हमारे को पता है तो सब चीज पहुंचा देता है। सब वेद पुरुष वो साबुन, स्नान का द्वार हो, कुछ भी चीज हम देखता है, एक साल हो गया हनुमान आया पहले, आप ही पहुंचा देता है खाना-पीना जो भी है। परमात्मा काहे, हमारा कुछ भी नहीं है।"

श्रील प्रभुपाद: "मैं नहीं पहुंचाता हूं, कृष्ण भगवान की अर्पण करता हूं।"

महिला: "काहे के लिए हम दोनों पहुंचा... तो उसके ये बेचारी जो चोला-डोला जो सुनाई करता है, जो वो भी हमारे घर में, ये सारा तकिया-बकिया सारे हमारे घर में, सब काम हमने किया खुशी से। [गला साफ़ करने की आवाज़] वो चक्की-बटी जो बनाई, वो भी हमारी बेटी से, बेटी-बेटा चलाई थी और बोला, 'अच्छा गुण है तुम्हारी, अभी तुम सेवा करेंगी तो तुम्हारा नसीब अच्छा बनेगा, भाव से बनेगा, पीछे मरने के बाद कोई अच्छा रास्ता मिल जाएगा।' अभी तो अच्छा सुना है, गीता पढ़ती है सुबह को चार-पांच बजे। तो माया English वाली छोड़ती तो 10:00 बजे उठती है सुबह, तो उठती नहीं। अभी बेचारी उठती, ऐसी बहुत खुशी होती। पहले तभी हमारी माता सुबह को 3:00 बजे पहुंचती, 'बेटी उठो और सुखम का पाठ करो और 4:00 बजे पूरा 4:00 बजे करो, 5:00 बजे चले जाओ घूमने, 6:00 बजे आओ, 7:00 बजे दुकान की सेवा करो, business-business का पालतू करो, फिर वो जब चले जाए तो फिर दूसरा काम करो।' अभी तो ऐसे काम हुआ है, तो बेटी-बेटी क्या हो गया है देखो, जाती है ये कर दिया वो कर दिया, इसमें अच्छा नहीं। तो अभी ठीक बात करो, अभी थोड़ी देरी हो गई है कि बहुत दुख हो गया हमारे को। चार-पांच दर्द है, हाथ की तकलीफ है थोड़ी और ये भाई जो भी होता है सर बुढ़ापे में सभी..."

श्रील प्रभुपाद: "ये बुढ़ापे में सभी काम... हमारा भी है, होता है।"

महिला: "तो अभी थोड़ा कम सुबह को है, आज बोला चौकरी में सुबह को 6:00 बजे चलो हमारे साथ।"

श्रील प्रभुपाद: "कितना उम्र हुआ? कितना उम्र हुआ आपका?"

महिला: "हमारी 50 और चार operation भी कराया पेट का।"

श्रील प्रभुपाद: "कोई बात नहीं, ये तो शरीर में रोग लगा ही पड़ा। जितना चलाएगा उतना चलेगा। वो दूसरे काम पर तो उठता है, बस भगवान के नाम पर बोलेगा सोएगा तो ऐसा काम चलेगा? सारा घर का प्रपंच चलता है।"

महिला: "वो कल class है और एकादशी कल है। कल एकादशी... हम तो आज कर... तो यहां भेज दिए, तो हम इसीलिए आज आई पूछने का, हम कैसे ये लोग एक दिन ऊपर करते हैं, सब अमो... हम करती है आज, तो Amogha करते हैं कल। और बोला भाई, ये बात तो तुम्हारी है, वो बोलता है हमारे टिप्पणी में ऐसा लगा है, प्रभुपाद ऐसा करता है क्योंकि 10 दिन पास होता है ना पूरा, तो हम लोग का विचार है सब दिन नहीं होता है।"

श्रील प्रभुपाद: "ये जो एकादशी तिथि नवमी में भी होती है ना, जैसा सूर्योदय होता है ना, उस समय एकादशी तिथि है तो हम लोग मानते हैं। और सूर्योदय में तिथि नहीं है, सूर्योदय है 5:00 बजे और एकादशी शुरू होती है 6:00 बजे, तो वो दिन हम लोग नहीं मानेंगे।"

महिला: "मैं टीप में देखी, तेजूराम टीप में देखी तो आज लिखी पड़ी है। आज हमारे घर में तो एकादशी आज है, तो दो छोकरी, हम, हमारी बहू सब आज एकादशी आज ही बनाएंगे। और वो गाजर भी मिलती है, उसकी बनाती है, खीर बनाती है पर खाती है, बस रात को भी खीर बनाती है, कुटी में बनाती है खीर का और मिठाई-विठाई थोड़ा जो हो गई। फिर भी सब कुछ इधर में परमात्मा किया है पूरा, तो इसीलिए कुछ नहीं। तो ये बोलता है नहीं, हमारी कल है। पूछा, हां बोला, 'कर दो।' अच्छा भाई, कल तो आगे ऐसा ही चलेगा। तो ने बोला इधर सिंघाड़ा आटा मिलता है नहीं?"

श्रील प्रभुपाद: "हां, सिंघाड़ा आटा मिलता है, क्यों नहीं?"

महिला: "हमारे घर में रखा है, हम अपने हाथ से बनाता है, बापू को नहीं देता। सिंघाड़ा मिलता है?"

श्रील प्रभुपाद: "हां, मिलता है इधर में।"

महिला: "ये नौकरानी-नौकरानी बनाते नहीं, हम आटा बनाते जमता है हमारे घर में पीसने का। उधर में बना के आटा रखते हैं, कढ़ी बनाते हैं, कढ़ी-पकोड़े, सिंघाड़े गांठे वो बनाते हैं। अगर वो बोलता है तो भाई जिस घर में कोई खाता है ना, उसी घर का हमारे को बनाना नहीं चाहिए, जिसके घर में ये खाना नहीं पका। हम बोला, 'हम खाता हूं तो इधर बनाओ छुप, जो भी बना के खिलाओ।' आज हम बोला तो कढ़ी बनाना हो तो हम आटा कढ़ी बनाओ, बखर-वखर डाल के कढ़ी बना। तो उसी ने बोला, 'मैं पहले पूछूंगा कढ़ी बना।' तो दुकान भी है मिठाई-मिठाई का, हलवा का वो है। बेचारी एक special वो कुछ खाती नहीं, बाहर के बर्तन नहीं खाती। दोस्तों, हम कल बोला, 'तुम आ रही है कल, गुलाब जामुन बना के लाओ।'"

श्रील प्रभुपाद: "We are checking calendar to stay, I think we ordered some, maybe one or two days before, got your list. I have to go to the calendar, find out. It's about 100. You should have consulted, because if it is today Ekadashi written there, then you are not even consult. [Music] One, two days before you should consult. Now suppose today Ekadashi, then what will do? Taking breakfast, we have taking breakfast. Of breakfast taking is not better. That Gulab Jamun that comes since atta, no, no, she knows..."

महिला: "और खीर, खीर, खीर से बनता है वो, उसमें कोई बात नहीं। अभी-अभी हमारे को हां बोलो तो मैं अभी भेजूं, अभी ले आया। और आलू और गाजर-वाजर भेज देती है ना, बोनी भेज दियो अभी। हां बोले तो तरकारी नहीं भेज, पकोड़ा-वकोड़ा उसका भी सुबह ने है। ये पकड़ने वाला बाप की बात है, ये लोग तो अभी सीख रहा है ना।"

श्रील प्रभुपाद: "हां।"

महिला: "इसका बाप-दादा भी कभी एकादशी नहीं किया।"

श्रील प्रभुपाद: "[हंसी] मगर हम बोला..."

महिला: "...को तो खाया जाता है एकादशी, तुम ये तो इतना कर रहा है, यही भी गनीमत है। ये तो सामान महान सा शराब पीने वाला है और सब अभी तो अच्छा बनता है। देखो, किसी के घर का हमारे घर में आता है ना जब भी, तभी भी दूध पीता है, fruit खाता है। क्योंकि दूसरे आदमी खाता है, हमारे लोग हमारे घर में छह आदमी है, दो-तीन खाता है, आधा खाता है, आधा बेचन हुआ है, तो हम क्या करें? पहले हमारा खाना बनता है, हमारे में लगा, फिर दूसरे को जो खाना है वो लगाओ। तो पर किसी को तो जाने नहीं देती है, तो बोला, 'हम पहले खाना बनाऊं तुम्हारे लिए, तुम खा के...' बोला, 'नहीं खाऊंगी भाई, जो तुम्हारी मर्जी।' पक्का बन गया है, पक्का बड़ा अच्छा है। इसका बाप उसको बोलता है, बोला 'हम नहीं, हमारे घर में आके बनाओ।' बहुत तकलीफ के साथ कभी-कभी अकेला था तो पता है हिंदू धर्म है, तो भाई अकेले मर्द पर कोई छोकरी पर जा नहीं सकते, बैठे तो कोई क्या बोले तो क्या बोले। तब बोला, 'भाई आ ही नहीं सकेंगे इधर बना।' बोला, 'नहीं ऐसा नहीं, इधर आके बना।' तो बना नहीं आना है तुमको नहीं। और है पर हनुमान बेचारा और था और गोपाला, उसकी उसकी वाली चाल और थी। उसी ने बहुत उसको बच्चे-बच्चे को ना बहुत खींचा था, बहुत बिल्कुल वो हंसता था, चर्चा-मचा करता था। वो सारे school, गांधी school में, प्रभुपाद एकदम उधर भी कीर्तन करो, सुबह के मकान में school में, गांधी school में करो, बच्चे-बच्चे को खींचो, बच्चे को बताओ। तो भाई English में क्या होगा? गीता का हो, भगवान क्या है, उसको तो सिखाना।"

श्रील प्रभुपाद: "अरे, पहले बच्चे का बाप तो सीखे। बाप सीखेगा, बच्चा भी सीखेगा। बाप पीता है क्या तो बच्चे का एक दिन में क्या सीखेगा?"

महिला: "हनुमान को इतनी नहीं थी कोई चीज, हम प्रेम से बना के इसको थोड़ा समझाओ। कोई प्रेम से बना के अच्छी तरह से चौका पहले धोकर सफा कर ले, आके बोले हमारे को नहीं चाहिए, तो हम बहुत दुखी होते हैं। ऐसा उसको करना नहीं चाहिए। देखो, भगवान बिल्ली का जूठा, कैसी बिल्ली गंदी, ऐसी का भी प्रेम वो तो दिया है..."

श्रील प्रभुपाद: "जो इसका ये भाव नहीं, भगवान को भोग लगाना चाहिए ना। तो जहां अखाद्य चीज सब बनता है, वो चीज भगवान को नहीं दिया जाता।"

महिला: "ये हां, वो तो हम लोग hotel में नहीं खाता है कभी। hotel में हम भी नहीं खाते, एक साल हुआ है। जब ये जो हवाई जहाज में सब खाने को देता है, हम लोग छूता भी नहीं।"

श्रील प्रभुपाद: "नहीं, कैसे छुएगा? कोई तो सब हाथ लगा है। इसलिए जहां मांस इत्यादि बनता है, उधर का चीज..."

महिला: "हम अपने हाथ से रोटी बनाते हैं, एक दिन को बनाती है, एक सुबह को बनाती है, एक रात को बनाती है। आप ही बनाती है, आप ही काट... छोकरी-छोकरी इतनी है, जोड़ी काटती है ना, उसको काटने में तो नहीं देती। बोले, 'आप ही काटेंगे, आप ही करेंगे, आप ही कर...' आप ही बाहरी चीजें भी खाती नहीं।"

श्रील प्रभुपाद: "विष्णु... मैं भी जब ये लोग शिष्य नहीं बना था America में, अपना ही हाथ से बना के खाता था।"

महिला: "अच्छा।"

श्रील प्रभुपाद: "क्या मुश्किल है? कुछ भी नहीं। वो आदमी का मन सच्चा होगे तो बस, जहां भी जाए तो..."

महिला: "तो अभी सबने नाश्ता नहीं किया है?"

श्रील प्रभुपाद: "किया है, हम तो किया है।"

महिला: "तो तो gas का तो एक दफा कलर होता है, तो 12:00 बजे एक दफा कर ले सब मना। अभी मैं बैठ का 10:00 तो है, तो सुबह को सब ले तो मिले नहीं हो जाए तो..."

श्रील प्रभुपाद: "हरे कृष्ण हरे कृष्ण..."

महिला: "हरे... कल से, कल से हाथ लगा के बैठा है आपके लिए कुछ पूछने का, बोलो ख्याल जो है ना खराब..."

श्रील प्रभुपाद: "क्या भाई? कैसे संस्कारों के ख्याल है, क्या है? पक्के भाई, समझ भी आता है क्या बात अच्छी है कि नहीं है? और टूटी भी है, फिर भी भूल होती है। वो काम करते सीख जाता है। कोई भी काम कीजिए, अभ्यास कीजिए, सब बदल पाएगा।"

महिला: "किसका आया? संतों की कृपा होती..."

श्रील प्रभुपाद: "संतों की कृपा होती है, control आ जाता है। संत बता सकता है ऐसा करो, कोई नहीं करेगा तो उसको क्या करेगा? रास्ता बता सकता है, 'इस रास्ते से जाओ।' तुम नहीं जाओगे तो फिर क्या करेगा? आदमी गिर गया है, उसको बोलेगा, 'देखो, इसको पकड़ो, हम उठा लेता है।' वो बोलता है, 'नहीं, कैसे उठाया जाए? कोई उपाय बताइए।' वो क्या? थप्पड़ और कुछ नहीं, थप्पड़-थप्पड़, बहुत थप्पड़, बस थप्पड़ और कोई उपाय नहीं। ये कोई बात है? एक आदमी गिर गया, उसको ऊपर से रस्सी दिया, 'ले, इसको पकड़ो, हम उठा लेता है।' वो बोलते, 'नहीं, कैसे उठाया जाए उसको?'"

महिला: "वो रस्सी क्या है महाराज?"

श्रील प्रभुपाद: "वो रस्सी कोई भी हो, अगर वो कहता है जो 'हमको आशीर्वाद दीजिए तब हम पकड़ेंगे', ये कोई बात नहीं है।"

महिला: "नहीं, हम बोले रस्सी क्या है? क्या है?"

श्रील प्रभुपाद: "रस्सी जो रास्ता है वो रस्सी है। रास्ता जो है वो रस्सी, ये रास्ता पकड़ो जाएगा। रस्सी नहीं पकड़ता, रास्ता नहीं लेता है तो कैसे? अपना बुद्धि... अब ये मौका मिला है, वो बोलता तकदीर में होगा, नहीं बोलता है क्या उपाय, क्या है उपाय? देखो ना, ये लोग सब कैसे छोड़ पड़ेगा? ये लोग सब शराब पीता था, मांस खाता था, सब कुछ करता था, छोड़ दिया। कह दिया छोड़ो, छोड़ दिया। नाम जप कर रहा है, नाम जप रहा है, कीर्तन कर रहा है, जो बात मैं बोल रहा हूं सुन रहा है, काम हो रहा है। अब सुनेगा नहीं, करेगा नहीं, ऐसी बात क्या बात करेगा? 'मंत्र आशीर्वाद काम करने...' आशीर्वाद काम करने से आशीर्वाद होगा आपका। भगवान, भगवान तो सबका हृदय में बैठे हुए हैं। एक आदमी देखता है जब काम करने शुरू किया है, फिर उसको कैसे भगवान बता देता है। ये सब काम कुछ करना-धरना नहीं है, खाली आशीर्वाद देके क्या? कुछ करना... अंदर की शांति चाहिए।"

महिला: "शांति..."

श्रील प्रभुपाद: "रास्ता वही है, भगवत भजन करने से शांति होती है। शांति के, शांति की रास्ता जो है भगवान बता रहे हैं भगवत गीता में। रास्ता लो, शांति देने के लिए भगवान खुद आते हैं, बोलो वृंदावन से खुद आते हैं, खुशामदी करते हैं। relation नहीं, भगवान अपना भक्तों को भेजता है, अपने खुद आते हैं। क्यों आते हैं? भगवान तो खुशामदी कह रहा है, 'शांति ले लो।' लेता नहीं, लेने... लेने के लिए तैयार... ऐसा बहुत सही है। कोई अपना पिता-माता, बेटा ऐसा कोई सुनता नहीं, पिता-माता का बात सुनता नहीं तो कैसे? अपना मां-बाप कोई खराब चीज बोलता नहीं, सब अपना बच्चे को बोला, 'बेटा, ऐसी...' अगर कोई सुनेगा नहीं तो बेचारी मां-बाप क्या करें? हम लोग का साथ देखते-देखते, सुनते-सुनते हो जाता काम। जैसे कोई लड़का कोई कारखाना में दे दिया, वो देखता है ऐसा हाजिरी पीटा जाता है, ऐसे ये करता है, ऐसा करता है, एक दिन वो भी गाड़ी हो गया, पहले जानता नहीं। पहले ऐसी हम लोग का भारत का ये विचार था, किसी लड़का कुछ काम सिखाना है, कोई कोई दुकानदार का पास दे दिया, कोई कारीगर का पास दे दिया, वो कारीगर उसको बोलता है, 'ऐसा कर, ऐसा कर, ये काम कर, वो काम कर।' करते-करते उसका दिमाग में समा जाता। तो सब चीज ही इस तरह... 'हम कुछ करेंगे नहीं साहब, हमको खाली आशीर्वाद...' ये सब चीज हम धोखा, तुमको करना पड़ेगा। अनुग्रह नहीं करते हो तो तुम्हारा... अभी हम लोग को पूछता है, 'भगवान को वो छपा है ना, this is God?' और पूछता है, 'भगवान को हम देखा है?' अरे, भगवान तो सब कुछ देख सकता है, भगवान देखना मुश्किल नहीं है। देखने का जो रास्ता है वो तो... ऐसा भगवान देख लेगा। कोई आके कह दिया magic करके, 'हम भगवान है', उसको तो देख लेगा और असल भगवान को देखेगा नहीं। जुआर भगवान को देख... तो भगवान सोना बनाने वाला, ये सब भगवान देखेगा और असल भगवान जो है, उसको देखने के लिए तैयार... ये सब चलता है। राक्षस आ गया, उसको बोला, 'हम भगवान मान लिया।' भगवान चलता है कि ये सब चलता नहीं। क्यों जी, नहीं चलता? यही तो चलता है। कोई राक्षस आकर बोल दिया, 'हम भगवान है, हम भगवान का अवतार है', उसको मान लिया भगवान। क्यों चलता है कि नहीं? सच्ची जब असल भगवान बोलेगा, 'हमको दिए नहीं साहब, भगवान दिखा नहीं।' अपने आप दिखाने की रास्ता बताते हैं भगवत गीता में कहते हैं, भगवान कहते हैं कि:

'रसोऽहमप्सु कौन्तेय प्रभास्मि शशिसूर्ययोः'

And I am the taste of water, the sun, the moon, I am the sound... भगवान बोलता है, 'देखो, हमको भगवान देखने के बता रहा है।' English आप लोग समझ जाएंगे नहीं? आप तो समझ जाएंगे, मेरी नहीं समझ... भगवान कहते हैं जो पानी में जो स्वाद है वो मैं हूं, और ये सूरज का जो किरण है वो मैं हूं, चंद्रमा का जो किरण है वो मैं हूं, वो आकाश में जो शब्द होता है वो मैं हूं, और कोई व्यक्ति असाधारण जिसके पास कुछ शक्ति है वो मैं हूं। तो इतना और बहुत बता... तो फिर भगवान को देखने में क्या मुश्किल है? कोई पानी पीता नहीं? पानी पीता है तो सब कोई, 20 दफा पानी पीता है और उसका taste है, वो भगवान कहता है, 'मैं वही हूं।' तो जब पानी पियो और जब taste अच्छा लगा कि 'आज शांति हो गया, हां भगवान आपको दर्शन...' उसके बाद दर्शन, इस तरह से practice करो, फिर एक दिन भगवान सामने आ... ये भी भगवान है, भगवान तो सभी कुछ है। तो जिसको अभी भगवत साक्षात दर्शन करने के लिए शक्ति है नहीं, आंख नहीं है, उसको बोलता है, 'ऐसा practice करो।' जैसे लड़का पहले ही A B C D लिखने से उसको बोले, 'लाइन खींच, ऐसा कर, ऐसा कर, ऐसा कर।' सब रास्ता है, आदमी सब सब लिखा है, सब बताया हुआ है, लेता नहीं। हंस बताता है, बाकी जिसको इच्छा है कि 'मैं जरूर भगवान से दर्शन करूं', उसके लिए रास्ता है, सब बता रहे हैं, 'ऐसा कर।' क्या मुश्किल है? ये लड़का भी देख सकता है। एक बच्चा जो है, उसको अगर बता दिया जाए, 'देखो बेटा, जब तुम पानी पिएगा तो तुमको जो आराम मिलेगा, स्वादन, वही भगवान बन जाएगा।' तो बच्चा भी देख सकता है, 'अब मैं पानी पी रहा हूं, बड़ा हमारा अभ्यास मित्र रहा है।' भगवान इसके लिए कोई वेद-वेदांत पढ़ने होता है क्या? बिना वेदांत हुए भगवान का दर्शन नहीं मिलेगा? बिना ब्राह्मण हुए, बिना बड़े पहलवान हुए, बड़े धनी हुए, ये सब होने से तभी भगवान को मिलेगा? नहीं, सब कोई, बुड्ढा भी कर सकता है, बच्चा भी कर सकता है, औरत भी कर सकता है, धनी भी कर सकता है, गरीब भी कर सकता है। जो रास्ता पकड़े तो उसको मिल जाए और कोई पैसा खर्च नहीं है। ये लोग बदमाश लोग करेगा नहीं और उसको कोई राक्षस आके कह दिया, 'देखो जी, हमेशा सोना बना दिया भगवान।' और जो सोना का खान बनाया है, वो भगवान को दिखा दे। एक छटाक सोना बनाया भगवान, और जो सोना का हजारों खान बनाया है, एक-एक धरित्री में नहीं, करोड़ों धरित्री है, और एक-एक धरित्री में ऐसा कितना सोना का खान है, वो भगवान नहीं है? वो ऐसा करके एक छटाक सोना बना दिया, magic दिखा दिया, वो भगवान! ये मूर्खों को कैसे सिखाया जाए? उसका दिमाग ही है ही नहीं। यदि हमको एक छटाक सोना बनाना है, उसको हमको भगवान मानना पड़ता है, जो करोड़ों मन सोना बना के रख दिया है, फिर उसको क्यों नहीं मानो भगवान? बाकी दिमाग है नहीं, छटाक का बुद्धि है, वो छटाक... थोड़ा दिमाग होना चाहिए तो फिर भगवान का, भगवान दर्शन होना बहुत सरल है। जैसे businessman हैं, सभी आते हैं, वो कोई रुपया-पैसा इधर के लिए आते हैं। आप लोग सब Sindhi लोग बहुत आते हैं, जो कमाने जानता है कमा लेता है, दो-चार करोड़ कमा लेता है, हवा से कमा लेता है, उसकी बुद्धि है। इधर Indonesian लोग हैं, ये लोग वही rickshaw चलाते हैं और आप लोग सब Sindhi हैं, इधर आके सब लाखों-करोड़ों रुपया कमा लिया, क्यों? बुद्धि है। वो कमा नहीं सकता है। तो इसी प्रकार थोड़ा बुद्धि से काम करने से भगवत दर्शन कोई मुश्किल नहीं, वो तो बच्चा भी कर सकता है। ऐसे सरल उपाय, छोटे-छोटे बच्चा है वो भी कर सकता, वो जल्दी कर लेगा। उसको अगर बता दिया जाए, 'बेटा, जब पानी पिएगा तुमको आराम मिलता, शांति मिलती, हां वही भगवान', वो सोचना शुरू कर देगा। नहीं तो भगवान नहीं होगा तो तपस्या हो गया, नहीं वो सरल रास्ता में नहीं जाएगा। एक आदमी को पूछा, 'नाक कहां है?' देखो जी, ये नाक। और एक बता, ये ये ये ये नाक। वो चाहता है ये ये बता दिया जाए, नहीं मानेगा। इतना सरल कलयुग के लिए भगवान खुद बताता है, केवल भगवान का नाम कर:

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे

कोई मुश्किल है? किसी का कोई नुकसान होता है? और कितना लाभ है देखो। ये लोग सब खाता था, सूअर खाता था, गाय खाता था, शराब पीता था, रंडीबाजी करता था, सब बदमाशी करता था, अब देखो कैसे हुआ। अभी कोई उसको एक लाख घूस दो और बोलोगे, 'थोड़ा बीड़ी पी लो', नहीं... दूसरा बात तो छोड़ दो, शराब पीना और क्या गांजा पीना है, ये तो बात छोड़ दो, उनको पिलाओ एक एक cigarette पिलाओ और बोलो, 'हमको लाख देगा', नहीं। तो practice करो सब चीजों का, practice करोगे नहीं, खाली बात का बात करने से कुछ नहीं। काम करो, शुरू कर, सब कोई भगवान को देख सकता है घर भर के, बिना पैसा खर्च किए यदि काम... सब कोई मिल सकता, भगवान मिलना कोई मुश्किल है क्या? ये भगवान कौन देखता नहीं, फिर क्यों पूछता है, 'जब भगवान को दिखाओ'? तो भगवान दिखाने के लिए आप ही भाग हुआ है, भगवान है, ये अलग नहीं है। बाकी हमारा देखने के लिए भगवान ऐसे ही खड़े हैं जो हम हाथ में ऐसे लेकर के भगवान को देख सकते हैं। बाकी है भगवान, और भगवान जो विश्व ब्रह्मांड में विश्वरूप है, उस भगवान को तुम कैसे देखोगे? तुम्हारा पता ही नहीं चलेगा किधर है। इसलिए भगवान कृपा करके ऐसी छोटी सी रूप धारण करके तुम्हारे सामने उपस्थित। देखो, भगवान, भगवान का, भगवान का तस्वीर से कोई फर्क नहीं है। ये अभज्ञान जैसा हमारा तस्वीर हमसे फर्क होता है, भगवान का नहीं होता है। ये सब विचार ग्रहण करना चाहिए, सोचना चाहिए थोड़ा। थोड़ा सा दिमाग समझने के लिए भगवान दिया ही है सबको दिया है। और जैसे ये बता रहे हैं, देखो जो पानी पीते हो वो आस्वादन करो, अच्छा उसको नहीं समझता आ जाए प्रभास में सबसे सूरज... ये सूरज का किरण जो है, धूप है, मैं... ये धूप को देख नहीं सकते? How many times... जहां धूप, रात खत्म हो गया, धूप पहुंच गया कमरे तक, अजी भगवान आ गया! ये सोचने में क्या खर्च होता है? इस समय इसी प्रकार सब समय अगर भगवान का चिंतन नहीं करूंगा तो फिर जीवन सफल हो गया? पानी पीता है, भगवान का स्मरण; धूप देखता है, भगवान का स्मरण हो गया; रात में चांद का किरण और आकाश में शब्द हुआ, गुरु... इसी प्रकार अभ्यास करो, देखोगे भगवान अपना हाथ... सब रास्ता बता दिया। किसी अवस्था में भगवान को तुम देख सकते हो, कोई भी अवस्था, कोई मुश्किल नहीं। अब तुम कहोगे, 'अजी ये तो धूप है, भगवान कहां है? ये तो पानी है, ये भगवान कहां?' अरे, भगवान खुद कह रहे हैं, 'मैं हूं।' फिर क्यों विश्वास नहीं करते? भगवान कह रहे हैं, 'मैं हूं' और..."
 
 
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥