श्रील प्रभुपाद के हिंदी में प्रवचन  »  761014AD-CHANDIGARH_Hindi.MP3
 
 
श्रील प्रभुपाद के हिंदी में प्रवचन
 
संबोधन
चंडीगढ़, 14-अक्टूबर-1976
 
 
 
[Opening]

इसलिए भगवान ये चैतन्य महाप्रभु रूप से आए। ये शास्त्र में विधान है कि:

"हरि कीर्तनाम कृष्णम जग संकी तन प्रा जजती सुमे"

ये शास्त्र में है विधान। कलयुग में जो भगवान की जो मूर्ति, जो चैतन्य महाप्रभु आपके सामने हैं, केवल हरि कीर्तन करके, जैसा ये लोग आपको दिखाया, जो चैतन्य महाप्रभु का पद अनुसरण करके, चैतन्य महाप्रभु ने दिखाया है, उसी को अनुसरण करते हैं।

हम लोग चैतन्य संप्रदाय। तो कलयुग इतना मूर्ख हो गया, पहले ही बताया, जो धर्म फल कुछ नहीं जानते हैं, सब भूल गया। इसलिए उनको जगाने के लिए यही एकमात्र उपाय है:

"कीर्तनात कृष्णस मुक्त संग परम ब्रजे"

केवल यदि हरे कृष्णा कीर्तन करें, तो आहिस्ता-आहिस्ता, आहिस्ता-आहिस्ते मुक्त हो जाएगा और परमधाम में चले जाएंगे। तो इसका नाम है धर्म। तो कलयुग में ये सब आदमी अत्यंत प्रतीत होने का कारण, ये भगवान कृष्णा नाम से, कृष्णा स्वयं कृष्णा, कृष्णा नाम से अवतार, इसको आप लोग ग्रहण कीजिए, सुखी हो जाएंगे।

"कल नाथा कि" यदि आप लोग कृष्णा नाम ग्रहण करेंगे, तो केवल ये हरे कृष्ण नाम से अपवित्र हो जाएंगे। आपको "चेत दर्जन", शरीर, मन में जो जितना गर्दे हैं, वो सब साफ हो जाएगा, "चेत तो द"। फिर आप समझ जाएंगे आपको क्या position है और आगे बढ़ने की।

ये change पहले तो "ना कर से वचन" पहले था, तो भगवान उनको शासन किया कि, "लेकिन तुम लड़ाई... आ, क्या दिल्लगी करते हो? हम लड़ाई नहीं करेंगे, ये कोई भद्र आदमी का बात है क्या? यह कोई आर्य का बात नहीं है, यह अनार्य का बात है। ऐसा मूर्ख है, तुम लड़ाई करने को आया और हमारा मित्र है, तुम परिचित है, अब भाग जा रहे हो।" तो ये मन उनका था क्या? कि भगवान बोल रहा है, "तू लड़ाई कर," वो कहते हैं, "ना कर वचन", "नहीं, तुम्हारा बात नहीं सुनेंगे।"

और भगवत गीता सुनके यह सिद्धांत "कर से उठ गया", वो "ना" नहीं है, "नहीं करेंगे", ये परिवर्तन हो गया। कोई समझ में मुश्किल नहीं। पहले था "न कर वचन", अब हो गया "करिश वचन"। ये change होना चाहिए। तो जो व्यक्ति ये change होता है, जो भगवान जो भगवत गीता में बोल रहा है, "करिश से वचन तव", वो उसका गीता पाठ सफल, और नहीं तो मूर्ख ही रहा, "नित मूढ़ा प्रती"। तो सबके उचित है जो गीता पढ़के बुद्धिमान हो जाए और कहे, "कर श्री वचन"। भगवान कृष्णा जो बोल रहा है, वही बात करें, बस।

मैंने पहले बताया था, प्रश्न जिसको करना, प्रश्न पहले नमस्कार करो। ये दो प्रश्न हैं, एक साथ मिलते हैं। एक है बड़े गुरु, और दूसरा है उसी के साथ मिलता है: "आपने कहा है कि ज्ञानी होते हुए भी अज्ञानी बनकर, गुरु कहलाकर लोग ठगते हैं। कृपा सच्चे गुरु की परिभाषा बताने की कृपा करें।"

हाँ, गुरु वही होता है कि जो भगवान जो बताते हैं, उसको प्रचार करे। भगवान जो बताते हैं: "सर्व धर्म परित शरण", ये धर्म है। और गुरु का काम है कि, "देखो जी, सब धर्म छोड़के कृष्ण के आचरण में शरणागत हो जाओ।" बस, वो गुरु है। और नहीं तो सब cheater हैं। जो खुद कृष्ण बन जाता है, वो cheater है; और जो बोलता है, "कृष्ण के चरण में शरणागत हो जाओ," वो गुरु है। बस, एक ही फर्क है। आप लोग उसको परख कर लीजिए। क्या बोलता है? देखिए, बोलता है जब कृष्ण जैसे बताते हैं, "माम", गुरु भी बोलता है जो कृष्ण के चरण में शरण... कृष्ण भगवान हैं और उनके चरण में शरण, वो गुरु है। और जो अनशन है, वो गुरु नहीं है। यह बात, दोनों बात सही देख लीजिए, हो गया।

कहते हैं, "पहला जो रामायण के अर्थात राम के नाम से बना, दूसरे में हुए और तीसरा जो कब होगा? पहला जो महाभारत का लड़ाई हुआ, पहला युग में हनुमान में राम-रावण के साथ हुआ, दूसरा में कृष्ण के महाभारत, और तीसरा में क्या होगा?"

तीसरा में आपको लड़ाई करना पड़ेगा! आप अवतार हैं! तीसरा में क्या होगा? अभी दूसरा में ही तो रहिए। दूसरा में जो भगवान कहते हैं, उसको तो मान लीजिए, फिर तीसरे की खबर लीजिए। अभी जो भगवान बोलता है, "सर्व धनज मांग शरण", उसको तो ग्रहण कीजिए, फिर तीसरे दफे क्या कहेंगे? तीसरे दफे हैं ये चैतन्य महाप्रभु। वो कहते हैं:

"हरे नाम हरे नाम हरे नाम केवलम कल ना"

ये शास्त्र का वचन है। चैतन्य महाप्रभु खुद नहीं, ये ब्रद नारद पुराण में ये वचन है कि कलयुग में केवल हरे नाम, हरे नाम, हरे नाम केवल, ये सब कीजिए तो आपको उपकार हो जाएगा, आप मुक्त हो जाएंगे, सुखी हो जाएंगे।

ये तो किसी ने ऐसा प्रश्न किया है, "श्री साईं बाबा से भगवान, गुरु, ये सब हम लोग नहीं जानते, हम लोग मूर्ख हैं, कृष्ण को ही जानते हैं और कुछ नहीं जानते।" हम लोग ज्यादा विद्वान नहीं, हम लोग एक जानते हैं: "कृष्णस भगवान श्याम", बस! और सब चोर हैं, बस! बताओ और क्या है? और किसी का कोई प्रश्न है? नहीं? बहुत खूब। अभी साहब...

[Closure]
 
 
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥