श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 99: सीता के रसातल - प्रवेश के पश्चात् श्रीराम की जीवनचर्या, रामराज्य की स्थिति तथा माताओं के परलोक-गमन आदि का वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.99.9 
दशवर्षसहस्राणि वाजिमेधानथाकरोत्।
वाजपेयान् दशगुणांस्तथा बहुसुवर्णकान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने दस हजार वर्षों तक अनेक अश्वमेध यज्ञ और दसगुने वाजपेय यज्ञ किए, जिनमें असंख्य स्वर्ण मुद्राएँ दक्षिणा के रूप में दी गईं॥9॥
 
He performed sacrifices for ten thousand years. He performed many Ashwamedha sacrifices and ten times as many Vajpeya sacrifices, in which innumerable gold coins were given as dakshina.॥9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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