Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.99.7-8: यज्ञ पूर्ण होने के बाद रघुकुल के राजा श्रीराम अपने दोनों पुत्रों के साथ रहने लगे। उन्होंने सीता के अतिरिक्त किसी अन्य स्त्री से विवाह नहीं किया। प्रत्येक यज्ञ में जब पत्नी की आवश्यकता होती थी, तब श्री रघुनाथजी सीता की स्वर्ण मूर्ति बनवाते थे। 7-8. | ramayan सर्ग 7.99: सीता के रसातल - प्रवेश के पश्चात् श्रीराम की जीवनचर्या, रामराज्य की स्थिति तथा माताओं के परलोक-गमन आदि का वर्णन । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इष्टयज्ञो नरपति: पुत्रद्वयसमन्वित:॥ ७॥
न सीताया: परां भार्यां वव्रे स रघुनन्दन:।
यज्ञे यज्ञे च पत्न्यर्थं जानकी काञ्चनीभवत्॥ ८॥
अनुवाद
यज्ञ पूर्ण होने के बाद रघुकुल के राजा श्रीराम अपने दोनों पुत्रों के साथ रहने लगे। उन्होंने सीता के अतिरिक्त किसी अन्य स्त्री से विवाह नहीं किया। प्रत्येक यज्ञ में जब पत्नी की आवश्यकता होती थी, तब श्री रघुनाथजी सीता की स्वर्ण मूर्ति बनवाते थे। 7-8.
After completing the yagya, King Shri Ram, the son of Raghukul, started living with his two sons. He did not marry any other woman except Sita. Whenever a wife was required in every yagya, Shri Raghunathji used to get a golden idol of Sita made. 7-8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥