श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 99: सीता के रसातल - प्रवेश के पश्चात् श्रीराम की जीवनचर्या, रामराज्य की स्थिति तथा माताओं के परलोक-गमन आदि का वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.99.20 
एवं वर्षसहस्राणि बहून्यथ ययु: सुखम्।
यज्ञैर्बहुविधं धर्मं वर्धयानस्य सर्वदा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री रघुनाथजी ने अनेक हजार वर्ष आनन्दपूर्वक यज्ञों द्वारा विविध धार्मिक कर्म करते हुए बिताए।
 
In this manner, Sri Raghunatha happily passed several thousand years by always performing various religious duties through yagnas.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे एकोनशततम: सर्ग: ॥ ९ ९॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें निन्यानबेवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ९ ९॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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