श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 99: सीता के रसातल - प्रवेश के पश्चात् श्रीराम की जीवनचर्या, रामराज्य की स्थिति तथा माताओं के परलोक-गमन आदि का वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.99.18 
तासां रामो महादानं काले काले प्रयच्छति।
मातॄणामविशेषेण ब्राह्मणेषु तपस्विषु॥ १८॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी समय-समय पर अपनी समस्त माताओं के निमित्त बिना किसी भेदभाव के तपस्वी ब्राह्मणों को बड़ा दान दिया करते थे॥ 18॥
 
From time to time, Shri Raghunath used to give large donations to ascetic Brahmins for the sake of all his mothers without any discrimination.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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