श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 99: सीता के रसातल - प्रवेश के पश्चात् श्रीराम की जीवनचर्या, रामराज्य की स्थिति तथा माताओं के परलोक-गमन आदि का वर्णन  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  7.99.16-17 
अन्वियाय सुमित्रा च कैकेयी च यशस्विनी।
धर्मं कृत्वा बहुविधं त्रिदेवे पर्यवस्थिता॥ १६॥
सर्वा: प्रमुदिता: स्वर्गे राज्ञा दशरथेन च।
समागता महाभागा: सर्वधर्मं च लेभिरे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रा और यशस्विनी कैकेयी भी उसी मार्ग पर चलीं। ये सभी रानियाँ अपने जीवनकाल में नाना प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान करके अन्त में साकेतधाम पहुँचीं और वहाँ राजा दशरथ से बड़ी प्रसन्नता के साथ मिलीं। उन परम सौभाग्यशाली रानियों को समस्त धार्मिक अनुष्ठानों का पूर्ण फल प्राप्त हुआ॥16-17॥
 
Sumitra and Yashaswini Kaikeyi also followed the same path. All these queens, after performing various types of religious practices during their lifetime, finally reached Saket Dham and met King Dasharath there with great happiness. Those highly fortunate queens received the full fruits of all the religious practices.॥16-17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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