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ramayan 7.99.15: बहुत समय बीत जाने पर परम तेजस्वी श्री रामजी की माता कौशल्या अपने पुत्रों और पौत्रों से घिरी हुई मृत्यु को प्राप्त हुईं॥15॥   |   ramayan सर्ग 7.99: सीता के रसातल - प्रवेश के पश्चात् श्रीराम की जीवनचर्या, रामराज्य की स्थिति तथा माताओं के परलोक-गमन आदि का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 99: सीता के रसातल - प्रवेश के पश्चात् श्रीराम की जीवनचर्या, रामराज्य की स्थिति तथा माताओं के परलोक-गमन आदि का वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.99.15 
अथ दीर्घस्य कालस्य राममाता यशस्विनी।
पुत्रपौत्रै: परिवृता कालधर्ममुपागमत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
बहुत समय बीत जाने पर परम तेजस्वी श्री रामजी की माता कौशल्या अपने पुत्रों और पौत्रों से घिरी हुई मृत्यु को प्राप्त हुईं॥15॥
 
After a long period of time had passed, surrounded by her sons and grandsons, the most glorious Sri Rama's mother Kausalya attained death. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)