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ramayan 7.98.25-26h: तत्पश्चात देवाधिदेव ब्रह्माजी के कहे हुए शुभ वचनों का स्मरण करके परम तेजस्वी श्री रामजी ने महर्षि वाल्मीकि से इस प्रकार कहा-॥25 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.98: सीता के लिये श्रीराम का खेद, ब्रह्माजी का उन्हें समझाना और उत्तरकाण्ड का शेष अंश सुनने के लिये प्रेरित करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 98: सीता के लिये श्रीराम का खेद, ब्रह्माजी का उन्हें समझाना और उत्तरकाण्ड का शेष अंश सुनने के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.98.25-26h 
ततो राम: शुभां वाणीं देवदेवस्य भाषिताम्॥ २५॥
श्रुत्वा परमतेजस्वी वाल्मीकिमिदमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात देवाधिदेव ब्रह्माजी के कहे हुए शुभ वचनों का स्मरण करके परम तेजस्वी श्री रामजी ने महर्षि वाल्मीकि से इस प्रकार कहा-॥25 1/2॥
 
After that, remembering the auspicious words spoken by Devadhidev Brahmaji, the most brilliant Shri Ramji said to Maharishi Valmiki in this way -॥ 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)