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ramayan 7.98.22: ककुत्स्थवीर रघुनन्दन! आप श्रेष्ठ राजा हैं। अतः इस उत्तम काव्य को पहले आप ही सुनें, अन्य किसी को नहीं।॥ 22॥   |   ramayan सर्ग 7.98: सीता के लिये श्रीराम का खेद, ब्रह्माजी का उन्हें समझाना और उत्तरकाण्ड का शेष अंश सुनने के लिये प्रेरित करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.98.22 
न खल्वन्येन काकुत्स्थ श्रोतव्यमिदमुत्तमम्।
परमं ऋषिणा वीर त्वयैव रघुनन्दन॥ २२॥
 
 
अनुवाद
ककुत्स्थवीर रघुनन्दन! आप श्रेष्ठ राजा हैं। अतः इस उत्तम काव्य को पहले आप ही सुनें, अन्य किसी को नहीं।॥ 22॥
 
Kakutsthveer Raghunandan! You are the best king. Therefore, you should listen to this excellent poem first, not anyone else.'॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)