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ramayan 7.98.2: परन्तु प्रभु श्री रामजी स्वयं बहुत दुःखी हो गए। उनका हृदय दुःखी हो गया और वे गूलर के एक पेड़ के सहारे खड़े हो गए। उनका सिर झुक गया और उनकी आँखों से आँसू बहने लगे॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 7.98: सीता के लिये श्रीराम का खेद, ब्रह्माजी का उन्हें समझाना और उत्तरकाण्ड का शेष अंश सुनने के लिये प्रेरित करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 98: सीता के लिये श्रीराम का खेद, ब्रह्माजी का उन्हें समझाना और उत्तरकाण्ड का शेष अंश सुनने के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.98.2 
दण्डकाष्ठमवष्टभ्य बाष्पव्याकुलितेक्षण:।
अवाक्शिरा दीनमना रामो ह्यासीत् सुदु:खित:॥ २॥
 
 
अनुवाद
परन्तु प्रभु श्री रामजी स्वयं बहुत दुःखी हो गए। उनका हृदय दुःखी हो गया और वे गूलर के एक पेड़ के सहारे खड़े हो गए। उनका सिर झुक गया और उनकी आँखों से आँसू बहने लगे॥ 2॥
 
But Lord Shri Ram himself became very sad. His heart became sad and he stood up with the support of a stick of fig tree and his head bowed down and tears started flowing from his eyes.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)