Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.98.17: वीर! महर्षि वाल्मीकि ने इसमें जन्म से लेकर अब तक जो सुख-दुःख तुमने सहे हैं, तथा सीता के अदृश्य होने के बाद भविष्य में जो घटनाएँ घटेंगी, उनका भी पूर्ण वर्णन किया है॥ 17॥ | ramayan सर्ग 7.98: सीता के लिये श्रीराम का खेद, ब्रह्माजी का उन्हें समझाना और उत्तरकाण्ड का शेष अंश सुनने के लिये प्रेरित करना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जन्मप्रभृति ते वीर सुखदु:खोपसेवनम्।
भविष्यदुत्तरं चेह सर्वं वाल्मीकिना कृतम्॥ १७॥
अनुवाद
वीर! महर्षि वाल्मीकि ने इसमें जन्म से लेकर अब तक जो सुख-दुःख तुमने सहे हैं, तथा सीता के अदृश्य होने के बाद भविष्य में जो घटनाएँ घटेंगी, उनका भी पूर्ण वर्णन किया है॥ 17॥
Valiant! The great sage Valmiki has fully described in this the joys and sorrows that you have (willingly) endured since your birth, as well as the events that will happen in the future after Sita's disappearance.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥