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ramayan 7.98.14: साध्वी सीता पूर्णतः पवित्र हैं। वे पहले से ही आपकी भक्ति में लीन हैं। आपकी शरण में ही उनकी आध्यात्मिक शक्ति है। इसी से वे नागलोक के बहाने आपके परमधाम को सुखपूर्वक चली गई हैं॥ 14॥   |   ramayan सर्ग 7.98: सीता के लिये श्रीराम का खेद, ब्रह्माजी का उन्हें समझाना और उत्तरकाण्ड का शेष अंश सुनने के लिये प्रेरित करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.98.14 
सीता हि विमला साध्वी तव पूर्वपरायणा।
नागलोकं सुखं प्रायात् त्वदाश्रयतपोबलात्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
साध्वी सीता पूर्णतः पवित्र हैं। वे पहले से ही आपकी भक्ति में लीन हैं। आपकी शरण में ही उनकी आध्यात्मिक शक्ति है। इसी से वे नागलोक के बहाने आपके परमधाम को सुखपूर्वक चली गई हैं॥ 14॥
 
‘Sadhvi Sita is completely pure. She is already devoted to you. Her spiritual power is in taking shelter of you. Through this she has happily gone to your Paramdham (supreme abode) on the pretext of Naglok.॥ ​​14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)