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ramayan 7.98.12: हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले श्री राम, आप मन में व्यथित न हों। शत्रुघ्न, अपने पूर्व स्वरूप का स्मरण करें।॥12॥   |   ramayan सर्ग 7.98: सीता के लिये श्रीराम का खेद, ब्रह्माजी का उन्हें समझाना और उत्तरकाण्ड का शेष अंश सुनने के लिये प्रेरित करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.98.12 
राम राम न संतापं कर्तुमर्हसि सुव्रत।
स्मर त्वं पूर्वकं भावं मन्त्रं चामित्रकर्शन॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले श्री राम, आप मन में व्यथित न हों। शत्रुघ्न, अपने पूर्व स्वरूप का स्मरण करें।॥12॥
 
O Shri Ram, the one who observes the best fast, do not be distressed in your mind. Shatrughan, remember your previous form.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)