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ramayan 7.97.9-10: देवताओं और ऋषियों को उपस्थित देखकर श्री रघुनाथजी ने पुनः कहा- 'सुरेशश्रेष्ठगण! यद्यपि मुझे महर्षि वाल्मीकि के निर्दोष वचनों पर पूर्ण विश्वास है, तथापि यदि जनता में विदेहकुमारी की पवित्रता सिद्ध हो जाए, तो मुझे अधिक प्रसन्नता होगी। 9-10॥   |   ramayan सर्ग 7.97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  7.97.9-10 
दृष्ट्वा देवानृषींश्चैव राघव: पुनरब्रवीत्॥ ९॥
प्रत्ययो मे सुरश्रेष्ठ ऋषिवाक्यैरकल्मषै:।
शुद्धायां जगतो मध्ये वैदेह्यां प्रीतिरस्तु मे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
देवताओं और ऋषियों को उपस्थित देखकर श्री रघुनाथजी ने पुनः कहा- 'सुरेशश्रेष्ठगण! यद्यपि मुझे महर्षि वाल्मीकि के निर्दोष वचनों पर पूर्ण विश्वास है, तथापि यदि जनता में विदेहकुमारी की पवित्रता सिद्ध हो जाए, तो मुझे अधिक प्रसन्नता होगी। 9-10॥
 
Seeing the gods and sages present, Shri Raghunathji again said – 'Sureshresthagan! Although I have full faith in the innocent words of Maharishi Valmiki, yet I will be more happy if the purity of Videha Kumari is proved among the public. 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)