श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.97.3 
प्रत्ययश्च पुरा वृत्तो वैदेह्या: सुरसंनिधौ।
शपथश्च कृतस्तत्र तेन वेश्म प्रवेशिता॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'एक बार मैंने देवताओं के समक्ष विदेहकुमारी की पवित्रता का विश्वास प्राप्त किया था। उस समय सीता ने स्वयं को पवित्र रखने की शपथ ली थी, जिसके कारण मैंने उन्हें अपने महल में स्थान दिया।
 
‘Once before I had gained the confidence of the purity of Videha Kumari in front of the gods. At that time Sita had taken an oath to keep herself pure, due to which I gave her a place in my palace.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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