| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » सर्ग 97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश » श्लोक 25 |
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| | | | श्लोक 7.97.25  | केचिद् विनेदु: संहृष्टा: केचिद् ध्यानपरायणा:।
केचिद् रामं निरीक्षन्ते केचित् सीतामचेतस:॥ २५॥ | | | | | | अनुवाद | | कोई हर्ष के मारे जयजयकार करने लगे, कोई ध्यान में मग्न हो गए, कोई राम की ओर देखने लगे और कोई विस्मित होकर सीता की ओर देखने लगे॥ 25॥ | | | | Some began to shout for joy, some became engrossed in meditation, some began to look at Rama and some, astonished, began to gaze at Sita.॥ 25॥ | | ✨ ai-generated | | |
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