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ramayan 7.97.21: अचानक देवताओं के मुख से 'धन्य-धन्य' महान शब्द प्रकट हुआ। वे कहने लगे - 'सीते! तुम धन्य हो, धन्य हो। तुम्हारा शील और स्वभाव इतना सुन्दर और पवित्र है।' 21॥   |   ramayan सर्ग 7.97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.97.21 
साधुकारश्च सुमहान् देवानां सहसोत्थित:।
साधुसाध्विति वै सीते यस्यास्ते शीलमीदृशम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
अचानक देवताओं के मुख से 'धन्य-धन्य' महान शब्द प्रकट हुआ। वे कहने लगे - 'सीते! तुम धन्य हो, धन्य हो। तुम्हारा शील और स्वभाव इतना सुन्दर और पवित्र है।' 21॥
 
Suddenly the great word ‘Dhanya-Dhanya’ appeared from the mouths of the gods. They started saying – ‘Site! You are blessed, blessed. Your modesty and nature is so beautiful and so pure. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)