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श्लोक  7.97.20 
तामासनगतां दृष्ट्वा प्रविशन्तीं रसातलम्।
पुष्पवृष्टिरविच्छिन्ना दिव्या सीतामवाकिरत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जब सीता देवी सिंहासन पर बैठकर रसातल में प्रवेश करने लगीं, तो देवताओं की दृष्टि उन पर पड़ी, तभी आकाश से उन पर दिव्य पुष्पों की वर्षा होने लगी।
 
When Sita Devi, sitting on the throne, started entering the abyss, the gods looked at her. Then, divine flowers started raining on her from the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)