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ramayan 7.97.2: महाभाग! आप धर्म के ज्ञाता हैं। सीता के विषय में आप जो कुछ कह रहे हैं, वह सत्य है। ब्रह्मन्! आपके इन निर्दोष वचनों से मुझे जनकनन्दिनी की पवित्रता पर पूर्ण विश्वास हो गया है।॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 7.97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.97.2 
एवमेतन्महाभाग यथा वदसि धर्मवित्।
प्रत्ययस्तु मम ब्रह्मंस्तव वाक्यैरकल्मषै:॥ २॥
 
 
अनुवाद
महाभाग! आप धर्म के ज्ञाता हैं। सीता के विषय में आप जो कुछ कह रहे हैं, वह सत्य है। ब्रह्मन्! आपके इन निर्दोष वचनों से मुझे जनकनन्दिनी की पवित्रता पर पूर्ण विश्वास हो गया है।॥ 2॥
 
‘Mahabhag! You are a knower of Dharma. Whatever you are saying about Sita is correct. Brahman! With these innocent words of yours, I have complete faith in the purity of Janakanandini.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)