श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.97.17 
तथा शपन्त्यां वैदेह्यां प्रादुरासीत् तदद्भुतम्।
भूतलादुत्थितं दिव्यं सिंहासनमनुत्तमम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
विदेहकुमारी सीता के इस प्रकार शपथ लेते ही पृथ्वी से एक अद्भुत सिंहासन प्रकट हुआ, जो अत्यंत सुंदर और दिव्य था ॥17॥
 
As soon as Videha Kumari Sita took this oath, a wonderful throne appeared from the earth, which was very beautiful and divine. ॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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