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ramayan 7.97.15: यदि मैं मन, वाणी और कर्म से केवल श्री रामजी का ही भजन करूँ, तो देवी पृथ्वी मुझे अपनी गोद में स्थान दें॥ 15॥   |   ramayan सर्ग 7.97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.97.15 
मनसा कर्मण वाचा यथा रामं समर्चये।
तथा मे माधवी देवी विवरं दातुमर्हति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं मन, वाणी और कर्म से केवल श्री रामजी का ही भजन करूँ, तो देवी पृथ्वी मुझे अपनी गोद में स्थान दें॥ 15॥
 
If I worship only Shri Ram through my mind, speech and actions, then may Goddess Earth give me a place in her lap.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)