Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.97.14: मैं श्री रघुनाथजी के अतिरिक्त किसी अन्य का चिंतन भी नहीं करता (स्पर्श करना तो दूर की बात है); यदि यह सत्य है तो देवी पृथ्वी मुझे अपनी गोद में स्थान दें॥ 14॥ | ramayan सर्ग 7.97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथाहं राघवादन्यं मनसापि न चिन्तये।
तथा मे माधवी देवी विवरं दातुमर्हति॥ १४॥
अनुवाद
मैं श्री रघुनाथजी के अतिरिक्त किसी अन्य का चिंतन भी नहीं करता (स्पर्श करना तो दूर की बात है); यदि यह सत्य है तो देवी पृथ्वी मुझे अपनी गोद में स्थान दें॥ 14॥
I do not even think of any person other than Shri Raghunathji (let alone touch him); if this is true then Goddess Earth should give me a place in her lap.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥