श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 97: सीता का शपथ ग्रहण और रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.97.1 
वाल्मीकिनैवमुक्तस्तु राघव: प्रत्यभाषत।
प्राञ्जलिर्जगतो मध्ये दृष्ट्वा तां वरवर्णिनीम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
महर्षि वाल्मीकि की यह बात सुनकर श्री रघुनाथजी ने सुन्दर सीतादेवी की ओर एक बार दृष्टि डाली और भीड़ के बीच में हाथ जोड़कर बोले -॥1॥
 
Upon hearing Maharishi Valmiki say this, Sri Raghunatha glanced at the beautiful Sita Devi once and said with folded hands in the midst of the crowd -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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