श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 95: श्रीराम का सीता से उनकी शुद्धता प्रमाणित करने के लिये शपथ कराने का विचार  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.95.9 
तेषां तद् भाषितं श्रुत्वा रामस्य च मनोगतम्।
विज्ञाय सुमहातेजा मुनिर्वाक्यमथाब्रवीत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
दूतों के वचन सुनकर और श्री रामजी का हृदयगत अभिप्राय समझकर महामुनि इस प्रकार बोले:-॥9॥
 
Having heard the words of the messengers and having understood the heartfelt intention of Shri Rama, that mighty sage spoke thus:-॥9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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