श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 95: श्रीराम का सीता से उनकी शुद्धता प्रमाणित करने के लिये शपथ कराने का विचार  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.95.5 
छन्दं मुनेश्च विज्ञाय सीतायाश्च मनोगतम्।
प्रत्ययं दातुकामायास्तत: शंसत मे लघु॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इस विषय में महर्षि वाल्मीकि और सीता का हार्दिक अभिप्राय जानकर कृपया मुझे शीघ्र बताइए कि क्या वे यहाँ आकर अपनी पवित्रता का आश्वासन देना चाहते हैं॥5॥
 
After knowing the heartfelt intentions of Maharishi Valmiki and Sita in this matter, please inform me quickly whether they wish to come here and assure themselves of their purity.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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