श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 95: श्रीराम का सीता से उनकी शुद्धता प्रमाणित करने के लिये शपथ कराने का विचार  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.95.17 
इति सम्प्रविचार्य राजसिंह:
श्वोभूते शपथस्य निश्चयम्।
विससर्ज मुनीन् नृपांश्च सर्वान्
स महात्मा महतो महानुभाव:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अगले दिन प्रातःकाल सीता से शपथ लेने का निश्चय करके महात्मा राजसिंह श्री राम ने उन समस्त ऋषियों और राजाओं को अपने-अपने स्थान पर जाने की अनुमति दे दी।
 
Thus, having resolved to take an oath from Sita the next morning, the great Mahatma Rajasingh Shri Ram gave permission to all those sages and kings to go to their respective places.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे पञ्चनवतितम: सर्ग: ॥ ९ ५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें पञ्चानबेवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ९ ५॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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