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ramayan 7.95.15: राजाओं ने भी महात्मा रघुनाथजी की स्तुति करके कहा - 'हे पुरुषोत्तम! इस पृथ्वी पर जो भी श्रेष्ठ कार्य हैं, वे सब आपमें ही संभव हैं, अन्य किसी में नहीं।'॥15॥   |   ramayan सर्ग 7.95: श्रीराम का सीता से उनकी शुद्धता प्रमाणित करने के लिये शपथ कराने का विचार   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 95: श्रीराम का सीता से उनकी शुद्धता प्रमाणित करने के लिये शपथ कराने का विचार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.95.15 
राजानश्च महात्मानं प्रशंसन्ति स्म राघवम्।
उपपन्नं नरश्रेष्ठ त्वय्येव भुवि नान्यत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
राजाओं ने भी महात्मा रघुनाथजी की स्तुति करके कहा - 'हे पुरुषोत्तम! इस पृथ्वी पर जो भी श्रेष्ठ कार्य हैं, वे सब आपमें ही संभव हैं, अन्य किसी में नहीं।'॥15॥
 
Even the kings praised Mahatma Raghunathji and said - 'O best of men! All the best things on this earth are possible only in you, not in anyone else.'॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)