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सर्ग 95: श्रीराम का सीता से उनकी शुद्धता प्रमाणित करने के लिये शपथ कराने का विचार
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श्लोक 14
श्लोक
7.95.14
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा राघवस्य महात्मन:।
सर्वेषामृषिमुख्यानां साधुवादो महानभूत्॥ १४॥
अनुवाद
महात्मा राघवेन्द्र के ये वचन सुनकर समस्त महर्षियों के मुख से महान कृतज्ञता की ध्वनि गूँजी॥14॥
Hearing these words of Mahatma Raghavendra, a sound of great gratitude echoed from the mouths of all the great sages. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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