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श्लोक 7.95.14  |
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा राघवस्य महात्मन:।
सर्वेषामृषिमुख्यानां साधुवादो महानभूत्॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| महात्मा राघवेन्द्र के ये वचन सुनकर समस्त महर्षियों के मुख से महान कृतज्ञता की ध्वनि गूँजी॥14॥ |
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| Hearing these words of Mahatma Raghavendra, a sound of great gratitude echoed from the mouths of all the great sages. 14॥ |
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