श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 95: श्रीराम का सीता से उनकी शुद्धता प्रमाणित करने के लिये शपथ कराने का विचार  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.95.13 
भगवन्त: सशिष्या वै सानुगाश्च नराधिपा:।
पश्यन्तु सीताशपथं यश्चैवान्योऽपि कांक्षते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
आप सभी पूज्य ऋषिगण अपने शिष्यों सहित सभा में पधारें। राजागण भी अपने सेवकों सहित उपस्थित रहें तथा जो अन्य लोग सीता की शपथ सुनना चाहें, वे भी आएँ। इस प्रकार सब लोग एकत्रित होकर सीता की शपथ देखें।॥13॥
 
‘All of you revered sages should come to the assembly along with your disciples. The kings should also be present along with their servants and anyone else who wants to hear Sita's oath should also come. In this way everyone should gather and watch Sita's oath taking.'॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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