श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 95: श्रीराम का सीता से उनकी शुद्धता प्रमाणित करने के लिये शपथ कराने का विचार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.95.12 
तत: प्रहृष्ट: काकुत्स्थ: श्रुत्वा वाक्यं महात्मन:।
ऋषींस्तत्र समेतांश्च राज्ञश्चैवाभ्यभाषत॥ १२॥
 
 
अनुवाद
महात्मा वाल्मीकि के वचन सुनकर श्री रघुनाथजी बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने वहाँ एकत्रित हुए ॥12� ...
 
Hearing the words of Mahatma Valmiki, Sri Raghunatha became very happy and he said to the sages and kings who had gathered there -॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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