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ramayan 7.95.10: ‘ऐसा ही होगा, तुम सबका कल्याण हो। श्री रघुनाथजी जो आज्ञा देंगे, सीता वही करेंगी; क्योंकि स्त्री के लिए पति ही देवता है।’॥10॥   |   ramayan सर्ग 7.95: श्रीराम का सीता से उनकी शुद्धता प्रमाणित करने के लिये शपथ कराने का विचार   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 95: श्रीराम का सीता से उनकी शुद्धता प्रमाणित करने के लिये शपथ कराने का विचार  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.95.10 
एवं भवतु भद्रं वो यथा वदति राघव:।
तथा करिष्यते सीता दैवतं हि पति: स्त्रिया:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘ऐसा ही होगा, तुम सबका कल्याण हो। श्री रघुनाथजी जो आज्ञा देंगे, सीता वही करेंगी; क्योंकि स्त्री के लिए पति ही देवता है।’॥10॥
 
‘It will be so, may it be good for you all. Sita will do whatever Shri Raghunathji commands; because the husband is a god for a woman.’॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)