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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 95: श्रीराम का सीता से उनकी शुद्धता प्रमाणित करने के लिये शपथ कराने का विचार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.95.1 
रामो बहून्यहान्येव तद् गीतं परमं शुभम्।
शुश्राव मुनिभि: सार्धं पार्थिवै: सह वानरै:॥ १॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री रघुनाथजी ने ऋषियों, राजाओं और वानरों के साथ बहुत दिनों तक अद्भुत रामायण का श्रवण किया।
 
In this manner, Sri Raghunatha, along with the sages, kings and monkeys, listened to the wonderful Ramayana song for many days.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)