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श्लोक  7.94.27 
आदिप्रभृति वै राजन् पञ्चसर्गशतानि च।
काण्डानि षट्कृतानीह सोत्तराणि महात्मना॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! उस महात्मा ने आदि से अन्त तक पाँच सौ स्कन्ध और छः अध्याय रचे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने उत्तरकाण्ड भी लिखा है।॥27॥
 
‘King! That great soul has created five hundred cantos and six chapters from beginning to end. Apart from these, he has also written Uttarakand.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)