श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 94: लव-कुश द्वारा रामायण-काव्य का गान तथा श्रीराम का उसे भरी सभा में सुनना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.94.25 
पृच्छन्तं राघवं वाक्यमूचतुर्मुनिदारकौ।
वाल्मीकिर्भगवान् कर्ता सम्प्राप्तो यज्ञसंविधम्।
येनेदं चरितं तुभ्यमशेषं सम्प्रदर्शितम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी से यह प्रश्न करते हुए दोनों ऋषिपुत्रों ने कहा, 'महाराज! जिस काव्य में आपके चरित्र का इस रूप में वर्णन किया गया है, वह भगवान वाल्मीकिजी ने लिखा है और वे इस यज्ञस्थल पर पधारे हैं।॥ 25॥
 
While asking this question to Sri Raghunath, both the sons of the sages said, 'Maharaj! The poem in which your character has been described in this form is written by Lord Valmiki and he has come to this place of sacrifice.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)