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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 94: लव-कुश द्वारा रामायण-काव्य का गान तथा श्रीराम का उसे भरी सभा में सुनना
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श्लोक 23
श्लोक
7.94.23
तस्य चैवागमं राम: काव्यस्य श्रोतुमुत्सुक:।
पप्रच्छ तौ महातेजास्तावुभौ मुनिदारकौ॥ २३॥
अनुवाद
तब श्री रामचन्द्रजी को यह जानने की जिज्ञासा हुई कि यह काव्य कैसे प्राप्त हुआ। तब महाबली रघुनाथजी ने उन दोनों ऋषिपुत्रों से पूछा -
Then Shri Ramchandraji became curious to hear how this poem was obtained. Then the mighty Raghunathji asked the two sage's sons -
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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