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श्लोक  7.94.23 
तस्य चैवागमं राम: काव्यस्य श्रोतुमुत्सुक:।
पप्रच्छ तौ महातेजास्तावुभौ मुनिदारकौ॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तब श्री रामचन्द्रजी को यह जानने की जिज्ञासा हुई कि यह काव्य कैसे प्राप्त हुआ। तब महाबली रघुनाथजी ने उन दोनों ऋषिपुत्रों से पूछा -
 
Then Shri Ramchandraji became curious to hear how this poem was obtained. Then the mighty Raghunathji asked the two sage's sons -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)