श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 94: लव-कुश द्वारा रामायण-काव्य का गान तथा श्रीराम का उसे भरी सभा में सुनना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.94.15 
जटिलौ यदि न स्यातां न वल्कलधरौ यदि।
विशेषं नाधिगच्छामो गायतो राघवस्य च॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यदि उनके सिर पर जटाएँ न होतीं और वे छाल के वस्त्र न धारण करते, तो हम श्री रामजी और इन दोनों गाते हुए कुमारों में कोई अंतर न देख पाते॥15॥
 
“If they did not have matted hair on their heads and had they not worn bark clothes, we would not have seen any difference between Sri Rama and these two Kumaras who are singing.”॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)