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तत: प्रवृत्तं मधुरं गान्धर्वमतिमानुषम्।
न च तृप्तिं ययु: सर्वे श्रोतारो गेयसम्पदा॥ १२॥
अनुवाद
तभी मधुर संगीत की तारें बजने लगीं। यह अत्यंत दिव्य गीत था। गीत की विशेष विशेषताओं के कारण सभी श्रोता मंत्रमुग्ध होकर सुनने लगे। कोई भी तृप्त नहीं हुआ।
Then the string of sweet music started playing. It was a very divine song. Due to the special qualities of the song, all the listeners were mesmerized and started listening. No one was satisfied.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥