Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.93.8: यहाँ पर्वत शिखरों पर अनेक प्रकार के स्वादिष्ट और मधुर फल हैं। (जब भूख लगे) उन्हें चखो और इस काव्य का गान करते रहो॥8॥   |   ramayan सर्ग 7.93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.93.8 
इमानि च फलान्यत्र स्वादूनि विविधानि च।
जातानि पर्वताग्रेषु आस्वाद्यास्वाद्य गायताम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यहाँ पर्वत शिखरों पर अनेक प्रकार के स्वादिष्ट और मधुर फल हैं। (जब भूख लगे) उन्हें चखो और इस काव्य का गान करते रहो॥8॥
 
Here on the peaks of the mountain there are many kinds of tasty and sweet fruits. Taste them (when you feel hungry) and keep on singing this poem.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)