Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.93.12: ‘धन के प्रति लोभी मत हो, आश्रम में रहने वाले और कंदमूल-फल खाने वाले वनवासियों को धन से क्या लेना-देना?॥12॥   |   ramayan सर्ग 7.93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 93: श्रीराम के यज्ञ में महर्षि वाल्मीकि का आगमन और उनका रामायणगान के लिये कुश और लव को आदेश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.93.12 
लोभश्चापि न कर्तव्य: स्वल्पोऽपि धनवाञ्छया।
किं धनेनाश्रमस्थानां फलमूलाशिनां सदा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘धन के प्रति लोभी मत हो, आश्रम में रहने वाले और कंदमूल-फल खाने वाले वनवासियों को धन से क्या लेना-देना?॥12॥
 
‘Do not be greedy for wealth, what do forest dwellers who live in ashrams and eat roots and fruits have to do with money?॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)