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ramayan 7.92.15-16h: जिसे सोना चाहिए था उसे सोना मिला, जिसे धन चाहिए था उसे धन मिला और जिसे रत्न चाहिए था उसे रत्न मिले।   |   ramayan सर्ग 7.92: श्रीराम के अश्वमेध यज्ञ में दान- मान की विशेषता   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 92: श्रीराम के अश्वमेध यज्ञ में दान- मान की विशेषता  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.92.15-16h 
य: कृत्यवान् सुवर्णेन सुवर्णं लभते स्म स:॥ १५॥
वित्तार्थी लभते वित्तं रत्नार्थी रत्नमेव च।
 
 
अनुवाद
जिसे सोना चाहिए था उसे सोना मिला, जिसे धन चाहिए था उसे धन मिला और जिसे रत्न चाहिए था उसे रत्न मिले।
 
One who needed gold got gold, one who wanted wealth got wealth and one who wanted gems got gems. 15 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)