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न नि:सृतं भवत्योष्ठाद् वचनं यावदर्थिनाम्॥ १२॥
तावद् वानररक्षोभिर्दत्तमेवाभ्यदृश्यत।
अनुवाद
जब तक भिखारियों के मन की बात उनके मुँह से बाहर नहीं निकलती, तब तक राक्षस और वानर उन्हें उनकी इच्छित वस्तुएँ दे देते थे। यह सबने देखा।
Until the thoughts of the beggars could come out from their lips, the demons and monkeys would give them their desired things. Everyone saw this. 12 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥