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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 91: श्रीराम के आदेश से अश्वमेध यज्ञ की तैयारी
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श्लोक 8
श्लोक
7.91.8
स तेषां द्विजमुख्यानां वाक्यमद्भुतदर्शनम्।
अश्वमेधाश्रितं श्रुत्वा भृशं प्रीतोऽभवत् तदा॥ ८॥
अनुवाद
अश्वमेध यज्ञ के विषय में उन श्रेष्ठ ब्राह्मणों के अद्भुत ज्ञानपूर्ण वचन सुनकर श्री रामचन्द्रजी को बहुत प्रसन्नता हुई॥8॥
Shri Ramchandraji felt very happy after hearing the wonderful wise words of those great Brahmins regarding Ashwamedha Yagya. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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