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प्राञ्जलि: स तदा भूत्वा राघवो द्विजसत्तमान्।
उवाच धर्मसंयुक्तमश्वमेधाश्रितं वच:॥ ६॥
अनुवाद
उस समय रघुकुलभूषण श्री राम ने हाथ जोड़कर उन श्रेष्ठ ब्राह्मणों से अश्वमेध यज्ञ के विषय में धर्म के उत्तम वचन बोले-॥6॥
At that time, Raghukulbhushan Shri Ram, with folded hands, spoke to those great Brahmins with the best words of religion regarding the Ashwamedha Yagya -॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥