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ramayan 7.91.5: जब ब्राह्मणों ने देखा कि भगवान के समान तेजस्वी और अत्यंत अजेय श्री राघवेन्द्र उनके चरणों में खड़े होकर उन्हें प्रणाम कर रहे हैं, तब उन्होंने उन्हें अपने शुभ आशीर्वादों से सम्मानित किया ॥5॥   |   ramayan सर्ग 7.91: श्रीराम के आदेश से अश्वमेध यज्ञ की तैयारी   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 91: श्रीराम के आदेश से अश्वमेध यज्ञ की तैयारी  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.91.5 
ते दृष्ट्वा देवसंकाशं कृतपादाभिवन्दनम्।
राघवं सुदुराधर्षमाशीर्भि: समपूजयन्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जब ब्राह्मणों ने देखा कि भगवान के समान तेजस्वी और अत्यंत अजेय श्री राघवेन्द्र उनके चरणों में खड़े होकर उन्हें प्रणाम कर रहे हैं, तब उन्होंने उन्हें अपने शुभ आशीर्वादों से सम्मानित किया ॥5॥
 
When the Brahmins saw that the god-like effulgent and extremely invincible Sri Raghavendra was standing and paying obeisance at their feet, they honoured him with their auspicious blessings. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)